कैसा देश है यह ? यहा मुढता को भी बडी शान से पेश किया जाता है l आपनी मुर्खता भी बडी इज्जत से पेश की जाती है l इस देश मे संतोष नाम रखा जाता है l यानी समाधानी l मरा हुआ जमीर , कुछ भी न करनेकी चाह , जो चल रहा है वही ठिक , चल रहा है चलने दो यानी संतोष l
आदमी है की पैदाइशी असमाधानी है l आदमी असंतुष्ट होता है l हर क्षण वह किसी न किसी लालच के लिए या फिर कुछ पाने के लिए तडफ रहा होता है l जो असंतोषी है उसका नाम संतोष कैसे हो सकता है l
लेकीन या नामकरण भी उपरी स्तर के लोग करते है l वे तय करते है की नाम भी विद्रोही न रख्खा जाय l इसलिए ब्राम्हनोंके जरिए ऐसे नाम डिझाईन किए गए है,या इन नामोंको ग्ल्यामर दिया गया है l सवाल नामोंका नही l विषय ऐसी संतोषी प्रवृत्ती का है l
असंतोषी ही विद्रोही होता है l जो संतोष है वह गुलाम है l जहा संतुष्टी वहा गुलामी l असंतोष यानी मानव होने का प्रमाण l मानव और पशु मे यही अंतर है असमाधानी असंतोषी व्रृत्ती का l
संतोष यानी समाधानी होना एक विचारधारा है व्यक्ती नही l और ऐसे संतोष जगह जगह बिखरे हुए है l इन्होंनेही जो चल रहा है उसे चलने देनी की एक अजीब व्यवस्था बनाई है l इनकी नजरिए से सब ठिक ठाक है , जो हो रहा है उसमे दखल अंदाजी मत दो , बस संतुष्ट रहो l यह संतोषी नही विघ्नसंतोषी लोग है l इनकी वजह से ही तो देश लुट गया,बिक गया l बरबाद हो गया l
संतोष एक नाम नही एक गुलाम आदत है l एक विचारधारा है l मैरा केहना नाम रखे वाले के लिए नही l संतोष नाम रखे वाले कई संतोष विद्रोही है l सवाल है ऐसी व्यवस्था बनानेवाले , ऐसे नाम रखने लायक वातावरण बनानेवाले , विचारधारा का है l
संतोष एक व्यक्ती नही बल्की एक आदत है , चुप रहनेकी आदत , सब सहनेकी आदत , थोपे हुए विचार संस्कृती व्यवहार को चुपचाप झेलने की आदत यानी संतोष l
संतोष भाई उठो देश लुट गया l किसान बरबाद हो गए l कामगार बेघर हो गए l हमाल बेसहारा हो गए l नौजवान बेकार हो गए l
संतोष असंतोष खडा करो ...
नितीन सावंत परभणी
9970744142
25 Sept 2020
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